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संघ ने किया जाति आधारित जनगणना का विरोध
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नागपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने जाति आधारित जनगणना को गलत ठहराते हुए मंगलवार को एलान किया कि वह ऎसे किसी भी प्रयास का तीव्र विरोध करेगा। संघ ने 1971 के बाद देश में आए बांग्लादेशी घुसपैठियों को जनगणना से दूर अलग रखने की भी मांग की है।
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आरएसएस के संघ शिक्षा वर्ग, तृतीय वर्ष के समापन समारोह के अवसर पर स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा, ""जाति के आधार पर जनगणना करना गलत है। संघ इसका क़डा विरोध करेगा। जनगणना एवं नागरिकता को एकसाथ जो़डना गलत है। संघ इसकी आलोचना करता है।"" उन्होंने कहा, ""एक तरफ जहां हम जाति विहीन समाज की बात करते हैं वहीं दूसरी तरफ जाति आधारित जनगणना का समर्थन किया जाता है। यह सरासर गलत है।"" धर्म आधारित आरक्षण का विरोध करते हुए भागवत ने कहा, ""आरक्षण देते वक्त उसे जाति और सम्प्रदाय से नहीं जाना चाहिए। ऎसा कदम उठाने से इसके विपरीत परिणाम सामने आएंगे।
भारतीय संविधान में साम्प्रदायिक आरक्षण का कोई स्थान नहीं है। ऎसे में सरकार यदि सम्प्रदाय के आधार पर आरक्षण देती है तो वह संविधान विरोधी है।"" असम में बांग्लादेशी घुसपैठ के मामले पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा, ""तो क्या सरकार पाकिस्तान से भारत आने वाले कसाब जैसे आतंकवादियों को भी भारत की नागरिकता देगी। असम में बांग्लादेशी घुसपैठ बढ़ती जा रही है। सरकार उनका मुकाबला करने की बजाए उन्हें सहारा दे रही है। सरकार घुसपैठियों की लगातार बढ़ती संख्या को नजरअंदाज कर रही है। इससे देश की अखंडता को खतरा पैदा होगा।"" इस अवसर पर मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्थित असम के सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी ज्योति प्रसाद राजखोवा ने कहा, ""2011 में होने वाली जनगणना के समय भारत सरकार को क़डे कदम उठाकर 1971 के बाद देश में आए बांग्लादेशी घुसपैठियों को दूर रखा जाए और उन्हें देश से बेदखल किया जाए।"" उन्होंने पूर्वोत्तर के राज्यों की सीमाओं को भी बंद करने की मांग उठाई।
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