’विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा’ के उद्घाटन के अवसर पर संबोधत करते हुए पेजावर पीठ के स्वामी मठाधीश पूज्य श्री विश्वेशतीर्थ स्वामी। मंच पर (बाएं से दाएं) रामचंद्रपुरा मठ के शंकराचार्य राघवेश्वर भारती स्वामी, पूज्य जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती और पूज्या दीदी माँ साध्वी ऋतंभरा।
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अनवरत शंखनाद से शुरू हुई 108 दिवसीय गौ ग्राम यात्रा
गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने से देश में शांति आएगी- विश्वेशतीर्थ स्वामी
भारत के विकास के लिए योजनाओं को ग्रामोन्मुख करना आवश्यक- भैया जी जोशी
भारत को आध्यात्मिक राष्ट्र घोषित किया जाय- अशोक सिंहल
गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाय- जोगिंदर सिंह
कुरूक्षेत्र. 30 सितंबर 2009। गोवंश के संवर्धन और ग्राम्य सभ्यता के संरक्षण के उद्देश्य से ’विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा’ का शुभारंभ आज हरियाणा के कुरूक्षेत्र में ।0 मिनटों से अधिक अनवरत शंखनाद और उस्ताद सईदुद्दीन डागर के गायन के साथ शुरू हुआ। ’विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा’ का यह राष्ट्रीय आंदोलन १०८ दिनों में २० हज़ार किलोमीटर से अधिक का मार्ग तय करेगा।
इस यात्रा का लक्ष्य है गाय और ग्राम का पुनः नवीनीकरण, जिससे विश्व का कल्याण हो। इस यात्रा में गो भक्त पहाड़ , घाटियों, नदियों और झीलों को पार करते हुए भारत के प्रमुख शहरों और 5 लाख हज़ार से ज्यादा गाँवों की यात्रा में लोगों के मन में गाय के प्रति जागरुकता बढायेंगे।
इस यात्रा का संकल्प रामचंद्रपुरा मठ के शंकराचार्य राघवेश्वर भारती स्वामी जी ने किया था। समारोह के उद्घाटन के अवसर पर उनके साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर कार्यवाह श्री भैया जी जोशी, पूज्य जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, पेजावर पीठ के स्वामी मठाधीश पूज्य श्री विश्वेशतीर्थ स्वामी, गोऋषि पूज्य श्री दत्तशरणानंद, पूज्या दीदी माँ साध्वी ऋतंभरा, पूज्य श्री स्वामी चिदनंद सरस्वती, पूज्य श्री स्वामी ज्ञानानंद, महंत मानदास महाराज, विश्व हिन्दु परिषद् के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अशोक सिंहल, भिक्कु विश्वबंधू, धर्माधिकारी डा. वीरेंद्र हेगड़े, पूज्य आचार्य श्री बलदेव, छोटे मियां मोइनुद्दीन साबरी, नवाब मज़दा अली खान हुसैन टीकरी, वनवासी कल्याण आश्रम के अध्यक्ष श्री जगदेवराम उरांव, फिल्म कलाकार सुरेश ओबराय, जलपुरुष श्री राजेंद्र सिंह, जैविक कृषि विशेषज्ञ पद्मश्री कुट्टिमेनन, सी.बी.आई. के पूर्व निदेशक श्री जोगिंदर सिंह, योग वैज्ञानिक डा. शर्ली टेलस, पर्वतारोही श्रीमती संतोष यादव और तिब्बत के निर्वासित संसद की डिप्टी स्पीकर डोलमा गेरी सहित कई गणमान्य लोगों ने गौपूजा की।
’विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा’ के उद्घाटन समारोह को संबोधत करते हुए विश्व हिन्दु परिषद् के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंहल. मंच पर बाएं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर कार्यवाह श्री भैया जी जोशी
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इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर कार्यवाह श्री भैया जी जोशी ने कहा कि इस यात्रा का उद्देश्य ग्राम्य सभ्यता का पुनरूज्जीवन है। उन्होंने कहा कि आज शहर ही विकास का केंद्र बने हुए हैं जबकि भारत के सर्वांगीण विकास के लिए योजनाओं को ग्रामोन्मुख करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांघी, जयप्रकाश नारायण और बिनोवा भावे जैसे महापुरूषों ने भारत को ग्रामोन्मुख करने की बात की थी। आज उन महापुरूषों के विचारों को अमल में लाना जरूरी है। विश्व मंगल गौ ग्राम यात्रा इसी उद्देश्य से शुरू की गयी है।
पेजावर पीठ के स्वामी विश्वेश तीर्थ ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किए जाने की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि व्याघ्र को राष्ट्रीय पशु माने जाने के कारण ही देश में आपराधिक प्रवृत्तियां और आतंकवादी घटनाएं बढ़ रही हैं। गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने से देश में शांति आएगी।
विश्व हिन्दु परिषद् के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंहल ने भारत को आध्यात्मिक राष्ट्र घोषित करने की मांग करते हुए कहा कि अपने देश को धर्मविहीन बनाने की अंग्रेजों की साजिश के अनुसार ही अपने देश का राजनीतिक नेतृत्व काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि इसी कारण देश में गोहत्या बढ़ी है। पिछले दस वर्षों में चार करोड़ गायों की हत्या हो चुकी है।
गायत्री परिवार के प्रमुख और यात्रा समिति के अध्यक्ष डा. प्रणव पांड्या ने उदघाटन समारोह के लिए भेजे अपने संबोधन में कहा कि आज गांव सिकुड़ रहे हैं और शहर फैल रहे हैं जिससे देश में अशांति, अराजकता और आतंकवाद फैल रहा है। यह यात्रा देश को इनसे मुक्ति दिलाने में सहायक होगी। यह यात्रा भारत के पूरब, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण चारों कोनों को एक सूत्र में बांधेगी। उन्होंने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित कर गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की। उन्होंने यात्रा में गायत्री परिवार द्वारा पूर्ण सहयोग दिए जाने की भी घोषणा की।
सी बी आई के पूर्व निदेशक सरदार जोगिंदर सिंह ने कहा कि अकबर ने गोहत्या को प्रतिबंधित कर दिया था। उसके अतिरिक्त बाबर और जहांगीर जैसे मुस्लिम शासकों ने भी गोहत्या पर आंशिक प्रतिबंध लगाने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाना ही चाहिए।