ठ्ठजागरण ब्यूरो, नई दिल्ली जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी के प्रशंसक इस बात से निराश हो सकते हैं कि सरकार उनकी मौत से जुड़े रहस्य को रहस्य ही बनाए रखना चाहती है। सरकार की टालमटोल इसी से पता चलती है कि पिछले सात महीने से गृह मंत्रालय मुखर्जी की मौत के सिलसिले में मांगी गई जानकारी को एक विभाग से दूसरे विभाग टहला रहा है लेकिन सूचना एक लाइन की भी नहीं दी। आल इंडिया लीगल एड फोरम के महासचिव जयदीप मुखर्जी ने गत 12 मई को सूचना का अधिकार कानून के तहत अर्जी दाखिल कर श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मौत से जुड़ी जानकारी मांगी थी। उन्होंने जो छह बिंदु सरकार को भेजे थे उनमें जानना चाहा था कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी की कश्मीर जेल में 23 जून 1953 को दिल का दौरा पड़ने से मौत हुई थी या फिर जेल अथारिटी की कोई लापरवाही इसके लिए जिम्मेदार थी। भारत सरकार इस निष्कर्ष पर कैसे पहंची कि मुखर्जी की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई। उनकी मौत के बाद क्या जम्मू कश्मीर राज्य या भारत सरकार ने उनका पोस्टमार्टम कराने का निर्देश दिया था। मुखर्जी की मौत से जुड़ी फाइल गृह मंत्रालय ने क्लासीफाइड (गोपनीय) फाइल के तौर पर रखी है या डिस क्लासीफाइड श्रेणी में। क्या जम्मू कश्मीर सरकार या भारत सरकार ने मुखर्जी की मौत की जांच कराई। क्या तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने इस पर संसद में कोई बयान दिया था या संबंधित अथारिटी से मुखर्जी की मौत से संबंधित स्थिति रिपोर्ट तलब की थी। इन छह जानकारियों में से सरकार ने एक भी नहीं दी है और अर्जी सात महीने से एक विभाग से दूसरे विभाग टहलती रही। गृह मंत्रालय ने स्वयं सूचना देने के बजाय अर्जी लोकसभा सचिवालय भेज दी।