पंडित दीनदयाल उपाध्याय और डॉ. राममनोहर लोहिया द्वारा 12 अप्रैल, 1964 को भारत – पाकिस्तान महासंघ के विचार को प्रस्तुत करने वाला संयुक्त वक्तव्य जारी किया गया था।पाठकों के लिए वह वक्तव्य अविकल रूप से यहाँ प्रस्तुत किया जा रहा है।आशा है आप अपनी राय से हमें अवगत करायेंगे।
हर नागरिक को स्वतंत्रता और सुरक्षा प्रदान करना भारत की एक पावन परंपरा है
“पूर्वी पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर हुए दंगों ने 2 लाख से अधिक हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों को भारत आने पर मजबूर किया है। पूर्वी बंगाल में हुई घटनाओं से स्वाभाविक रूप से भारतीयों में उत्तेजना है। स्थिति को नियंत्रण में लाने और इस रोग के सही इलाज के लिए यह आवश्यक है कि इसका सही ढंग से निदान किया जाए और मानसिक पीड़ा की इस दशा में भी हमारे राष्ट्रीय जीवन के बुनियादी मूल्य भुलाए नहीं जाने चाहिए।
हमारा यह दृढ़ मत है कि पाकिस्तान के हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों के जीवन और संपत्ति की सुरक्षा की गारंटी देना भारत सरकार की जिम्मेदारी है। इस मामले में निरा कानूनी दृष्टिकोण लेते हुए यह कहना कि पाकिस्तान में रहनेवाले हिंदू पाकिस्तानी नागरिक हैं, खतरनाक होगा और इससे दोनों देशों में कम या ज्यादा मात्रा में मार-काट और प्रतिहिंसा फैलेगी। जब भारत सरकार पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों के प्रति अपना उत्तरदायित्व निभाने में असफल रहती है तो लोगों का क्रुद्ध होना स्वाभाविक है। जनता से हमारी अपील यह है कि वे अपना रोष सरकार पर प्रकट करें और किसी भी हालत में भारतीय मुसलमानों को उसका शिकार न बनाएँ। यदि जनता आपस में लड़ती है तो इससे सरकार को अपनी काहिली और असफलता छिपाने, जनता को बदनाम करने और उस पर जुल्म ढाने का मौका मिलता है। जहाँ तक भारतीय मुसलमानों का संबंध है, हमारा यह दृढ़ मत है कि अन्य सभी नागरिकों के समान, सभी परिस्थितियों में, उनके जीवन और संपत्ति की रक्षा की जानी चाहिए। कोई भी घटना या तर्क इस सच्चाई से समझौता करने को सही नहीं ठहरा सकते। एक राज्य, जो अपने नागरिकों को जीने के अधिकार गारंटी नहीं दे सकता और ऐसे नागरिक, जो अपने पड़ोसियों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सकते, बर्बर ही कहलाएँगे। चाहे उसका धर्म कोई भी हो, हर नागरिक को स्वतंत्रता और सुरक्षा प्रदान करना वास्तव में भारत की एक पावन परंपरा रही है। इस संबंध में हम हर भारतीय मुसलमान को पुन: आश्वस्त करते हुए हर हिंदू घर में यह संदेश पहुँचाने की कामना करते हैं कि इस आश्वासन को पूरा करना उनका नागरिक और राष्ट्रीय कर्तव्य है।
हमारा यह मानना है कि दो भिन्न देशों के रूप में भारत और पाकिस्तान का अस्तित्व एक कृत्रिम स्थिति है। दोनों सरकारों के संबंधों में मन-मुटाव असंतुलित दृष्टिकोण और टुकड़ों में बात करने की प्रवृत्ति का परिणाम है। दोनों सरकारों के बीच चलनेवाला संवाद टुकड़ों में ही न होकर निष्पक्षता से होना चाहिए। ऐसी खुले दिल से होनेवाली बातचीत से ही विभिन्न समस्याओं का समाधान निकल सकता है, सद्भावना पैदा की जा सकती है और किसी प्रकार के भारत-पाक महासंघ बनाने की दिशा में शुरुआत की जा सकती है। ”
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