स्विस बैंकों से धन वापसी के लिए राजनैतिक इच्छाशक्ति का होना बहुत जरूरी - प्रो. आर. वैद्यनाथन
नई दिल्ली १३ अप्रैल २००९
आज विश्व वैश्विक वित्तीय मंदी के दौर से गुजर रहा है, भारतीयों द्वारा लगभग 75 लाख करोड़ रुपए ($ 1.5 ट्रिलियन) की अकूत राशि अवैध रूप से स्विस बैंकों में जमा की गई है। स्विस बैंकों से काले धन को वापस लाने के लिए भारत के पास यह अभूतपूर्व अवसर है। प्रो. आर. वैद्यनाथन ने "अवैध रूप से भारतीय धन के दूसरे देशों में प्रवाह" पर सोमवार को विवेकानन्द केन्द्र द्वारा आयोजित एक व्याख्यान में ये बात कही।
उन्होंने इस अवसर पर कहा कि भारतीय धन को स्विस बैंकों से वापस लाने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति का होना सबसे आवश्यक है। प्रो. आर. वैद्यनाथन, भारतीय प्रबंध संस्थान, बंगलूरू में अर्थशास्त्र के प्राध्यापक हैं। ग्लोबल फंड फ्लो (global fund flow) पर उनकी काफी पकड़ है और इससे संबंधित कई सरकारी समितियों में वे संलग्न हैं।
आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) ने यह अनुमान लगाया है कि 750 लाख करोड़ रुपए से भी अधिक राशि कर मुक्ति वाले देशों में अन्तरित हो चुकी है। यह ग्यारहवां अवसर था जब जी -20 के नेता विश्व अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए इस राशि के लिए सहमत हुए हैं।
वर्तमान स्थिति को देखते हुए श्री वैद्यनाथन ने कहा कि भारत के लिए ये अनुकूल समय है कि भारतीय नागरिकों और कंपनियों द्वारा विदेशों में जो बेहिसाब दौलत विस्थापित की गई है उसे प्रयत्नपूर्वक वापस लाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ये वित्तीय स्थिति कुछ विकसित देशों के लिए भी गंभीर है। इसलिए वे स्विट्जरलैंड और अन्य कर मुक्त देशों पर खातों के विवरण का खुलासा करने के लिए दबाव ड़ाल रहे हैं। अमेरिका के बारे में उन्होंने कहा कि अमेरिका प्रति वर्ष अनुमानित 100 अरब अमेरिकी डालर (5 लाख करोड़ रुपए) जिसका कोई हिसाब नहीं है खोता जा रहा है। जिसका उपयोग अमेरिकी सरकार द्वारा मंदी से पूर्व 'जेब खर्च' के रूप में किया जा रहा था, लेकिन अब, वह इस राशि पर गंभीरता से नज़र रखे हुए है।
आतंकवाद पर वैश्विक कानूनी कार्यवाही भी इसका एक प्रमुख कारण है। वित्तीय अनुशासनहीनता ने कई मार्ग खोले हैं और सरकारी कर अथवा राजश्व से बचने के लिए कहीं न कहीं कर प्राधिकरण के नियमों की शिथिलता का भी इसमें सहयोग रहता है। विश्व भर में कर संग्रहण एवं कराधान कानून के अन्तर्गत चिन्हित किए गए ७४ देशों में स्विट्जरलैंड को क्यों बाहर रखा गया है। भारत का स्विट्जरलैंड के साथ परंपरागत सम्बन्ध रहा है। इसके बावजूद भी गोपनीयता और कड़ी निजता वाले कानून की बात क्यूं आती है।
उन्होंने अनुमान लगाते हुए कहा कि आज स्विस बैंकों में भारतीयों के अवैध धन का एक तिहाई हिस्सा देश से बाहर विदेशों में अन्तरित किया गया है। अब स्विस सरकार अमेरिका और अन्य आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) के सदस्य देशों जैसे जर्मनी, फ्रान्स, ब्रिटेन और भारत के दबाव में है जो उस पर सभी खाताधारकों के नाम सार्वजनिक करने और अन्य विस्तृत विवरण का खुलासा करने का दबाव डाल रहे हैं।
प्रो. आर. वैद्यनाथन ने कहा कि उन्होंने इस सारे विस्तृत विवरण को भारत में कई सरकारी संस्थाऒं के सम्मुख रखा, लेकिन इसके लिए किसी ने कुछ नहीं किया। बजाय किसी छानबीन के उन्होंने मुझसे ही विस्तृत विवरण की मांग कर डाली और विडंबना यह कि मैं तो मात्र शिक्षाविद हूं।
स्विस बैंकों से भारतीय धन को वापस लाने के अभियान में श्री वैद्यनाथन ने भारतीय जनता पार्टी के नेता श्री लाल कृष्ण आडवाणी के साथ एक विशेषज्ञ के रूप में सहयोग करने की बात कही।
क्या हम इस अकूत धन को वापस पा सकते हैं? इस पर उन्होंने कहा कि इस धन को वापस लाने के लिए राजनैतिक इच्छाशक्ति बहुत जरूरी है। जब नाइजीरिया, इटली, फिलीपीन्स जैसे देश काले धन को अपने देश में वापस ला सकते हैं तो भला हम क्यों नहीं। इसके लिए जरूरी है कि इसे वैश्विक एजेंडा बनाया जाय, जी - २०, आई.एम.एफ. तथा ईग्मोंट समूह (EGMONT Group) के समक्ष भी रखने की आवश्यकता है।
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