भारत नीति प्रतिष्ठान की पुस्तक "भ्रामक समानता- 'समान अवसर आयोग' की समीक्षा" का लोकार्पण
नागरिक और समुदाय के बीच भेदभाव की साजिश है 'समान अवसर आयोग'
किसी विशेष समूह या धर्म की आड़ में बनने वाला कानून हमारे राष्ट्र जीवन में अलगाववाद का भाव पैदा करेगा- आरिफ मोहम्मद खान, पूर्व केंद्रीय मंत्री
नई दिल्ली, ८ अगस्त २००९।
नई दिल्ली, ८ अगस्त २००९। पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री आरिफ मोहम्मद खान ने सरकार द्वारा प्रस्तावित 'समान अवसर आयोग' की आलोचना करते हुए कहा है कि यह आयोग उस व्यक्ति को राहत की बात करता है जो किसी समुदाय विशेष का सदस्य होने के नाते संस्थागत भेदभाव का शिकार है। यह नागरिकों के बीच भेदभाव को बढ़ाने में सहायक होगा। श्री खान शनिवार को नई दिल्ली स्थित कांस्टीट्यूशन क्लब में भारत नीति प्रतिष्ठान की पुस्तक "भ्रामक समानता- 'समान अवसर आयोग' की समीक्षा" के लोकार्पण कार्यक्रम में विचार व्यक्त कर रहे थे। पुस्तक का विमोचन लोकसभा उपाध्यक्ष श्री करिया मुंडा ने किया।
इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार श्री राजेन्द्र पुरी, भारत नीति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष श्री बजरंग लाल गुप्ता और पुस्तक के लेखक व प्रतिष्ठान के निदेशक श्री राकेश सिन्हा भी उपस्थित थे।
श्री आरिफ मोहम्मद खान ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक श्री माधव राव सदाशिव राव गोलवलकर (गुरूजी) के आर्गनाईजर में छपे साक्षात्कार का जिक्र किया जिसमें उन्होंने कहा था कि 'हिन्दू और मुसलमानों के बीच जो भाई-चारे की बात होनी चाहिये वह नहीं है और जो मुसलमानों को खुश करना चाहते हैं वो मुसलमानों को भाई की तरह नहीं मानते'। श्री खान ने कहा कि आज भी मुसलमान दो विरोधी ध्रुवों के बीच फंसे है- एक उन्हें वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करते हैं, दूसरे उनकी पहचान को मिटाने का काम करते हैं। ये दोनों ही मुसलमानों के लिए घातक हैं। उन्होंने कहा कि सिर्फ कानून बदल देने से मानसिकता नहीं बदलती। समान अवसर हर भारतीय नागरिक का अधिकार होना चाहिए, किसी विशेष समूह या धर्म की आड़ में बनने वाला कानून हमारे राष्ट्र जीवन में अलगाववाद का भाव पैदा करेगा। यह देश और समाज के लिए ठीक नहीं है।
ज्ञातव्य है कि अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्री श्री सलमान खुर्शीद ने जुलाई में कुछ विकसित देशों की तरह संसद में इस आयोग के गठन का प्रस्ताव दिया था जो मौजूदा मानवाधिकार आयोग और अल्पसंख्यक आयोग से आगे जाकर यह अल्पसंख्यकों आयोग लोगों को रोजगार के क्षेत्र में समान अवसर दिलवाने के लिए काम करेगा। यह लोगों की व्यक्तिगत समस्याओं की जगह किसी खास समूह के साथ हो रहे भेद-भाव की शिकायत पर सुनवाई करेगा। इससे पहले अल्पसंख्यकों के विकास के लिए गठित की गयी राजेंद्र सच्चर कमेटी ने भी समान अवसर आयोग के गठन की जरूरत पर जोर दिया था।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लोकसभा उपाध्यक्ष श्री करिया मुंडा ने कहा कि देश के संविधान ने प्रत्येक नागरिक को मौलिक अधिकार दिए हैं। पर जागरूकता के अभाव में लोग अपने आधिकारों का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई समुदाय पिछड़ता है तो दोषी समुदाय नहीं बल्कि सरकार और उसके नीतियों के क्रियान्वयन करने वाले लोग हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ पत्रकार और कार्टूनिस्ट श्री राजेन्द्र पुरी ने कहा कि देश में जाति व मजहब के नाम पर भेदभाव अमानवीय है इसका व्यापक स्तर पर विरोध होना चाहिए। श्री पुरी ने सरकार की आरक्षण नीति की आलोचना करते हुए कहा कि आरक्षण का आधार जाति व मजहब नहीं बल्कि आर्थिक और गरीबी होना चाहिए जिसमे समान पेशे वालों के आरक्षण का मापदंड एक समान हो। उन्होंने कहा कि वर्तमान आरक्षण प्रणाली का लाभ पिछड़े वर्गों का प्रभावशाली वर्ग ही उठा रहा है.
पुस्तक के लेखक श्री राकेश सिन्हा ने पुस्तक पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह 'समान अवसर आयोग' का एक मोनोग्राफ है। उन्होंने कहा कि आयोग में समूह को पहचान का आधार बनाया गया है। शिक्षा, रोजगार और भेदभाव से पीड़ित हर व्यक्ति अपनी शिकायत लेकर इस प्रस्तावित आयोग के पास नहीं जा सकता, इसमे केवल एक विशेष धार्मिक समुदाय के लोग ही अपनी शिकायत लेकर आयोग के पास जा सकते हैं। श्री सिन्हा ने कहा कि यह आयोग मुस्लिम समाज के लिए गठित की गयी सच्चर कमेटी की सिफारिश पर बनाया जा रहा है. लेकिन सच्चर कमेटी मुसलमानों के साथ हो रहे संस्थागत भेदभाव के सन्दर्भ में कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं रख पाई और अनुमानों के आधार पर समान अवसर आयोग की सिफारिश की. श्री सिन्हा ने यह प्रश्न उठाया कि क्या अनुमानों के आधार पर ही नीति-निर्धारण की जानी चाहिए?
प्रतिष्ठान के अध्यक्ष श्री बजरंग लाल गुप्ता ने कहा कि एक से छिनकर दुसरे को देने की प्रक्रिया ही इस आयोग का आधार है जो अल्पसंख्यक मंत्रालय के अधीन काम करेगा। उन्होंने कहा कि समान अवसर आयोग धर्म निरपेक्षता एवं राष्ट्रीय एकता दोनों के लिए घातक है। इस आयोग के द्वारा मुसलमानों को आरक्षण देने का रास्ता ढूंढा जा रहा है, जिनको सच्चर कमेटी ने पिछड़ा सामाजिक आर्थिक वर्ग घोषित किया है। श्री गुप्ता ने इस आयोग को खारिज किये जाने की मांग की.
कार्यक्रम का राजस्थान विश्वविद्यालय की संचालन प्रो. शीला राय ने किया।
प्रदीप कुमार मिश्रा
शोध पत्रकार