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डा. श्यामाप्रसाद मुकर्जी के बलिदान ने बदला भारत का इतिहास : लालकृष्ण आडवाणी
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डा.श्यामा प्रसाद मुकर्जी के बलिदान को सच्ची श्रद्धांजलि देने का एकमात्र रास्ता यही है किहम उनके विचारों को प्रासंगिक बनाए रखें और जनता में उनके विचारों को बेहतर तरीके से प्रसारित करें उक्त बातें भाजपासंसदीय दल अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने डा.श्यामाप्रसाद मुकर्जी स्मृति न्यास द्वा-रा आयोजित उनकी 57 वीं पुण्यतिथि के अवसर पर कही | उन्होंने कहा कि उनका बलिदान इतिहास को परिवर्तित करनेवाला था | जम्मू-कश्मीर में अपने संघर्ष के दिनों में उन्होंने अनुच्छेद 370 का विरोध किया | डा. मुकर्जी ने हमेशा जम्मू- कश्मीर के तत्कालीन मुख्यमंत्री शेख अब्दुल्ला के उस कथन का विरोध किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि इस क्षेत्र में बिना परमिट कोई प्रवेश नहीं कर सकता | यह ठीक उसी तरह की बात हुई कि चुनाव आयोग और उच्च न्यायालय का अधिकार सम्पूर्ण भारत पर होगा जबकि जम्मू- कश्मीर में नहीं होगा |
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डा. श्यामा प्रसाद के बलिदान के समय के एक वाकया का जिक्र करते हुए लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि उस समय वे राजस्थान में थे और रात के करीब 3 बजे का समय था | जब एक पत्रकार रोते-बिलखते उनके पास आया और कहने लगा कि श्यामाप्रसाद जी हमारे बीच नहीं रहे | उस पत्रकार का भाव यह साफ़ तौर पर बता रहा था कि जम्मू-कश्मीर में उनकी देश की एकता और अखण्डता विरोधी नीतियों के खिलाफ चलाये गए अभियान का प्रभाव लोगों पर किस हद तक था | जनसंघ की स्थापना के समय ही डा.श्यामा प्रसाद मुकर्जी ने देश के वर्तमान हालातों को देखते हुए यह निर्णय लिया था कि भारत का विघटन वे कभी नहीं होने देंगे | कानपुर में आयोजित जनसंघ के पहले अधिवेशन का जिक्र करते हुए आडवाणी ने कहा कि उस समय डा.मुकर्जी ने एक नारा दिया '' एक देश में दो प्रधान, दो विधान, दो निशान नहीं चलेंगे'' जो अपने आप में जम्मू-कश्मीर की सभी समस्याओं को समेटे हुए था | कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संस्था के अध्यक्ष वेंकैया नायडू ने कहा कि इस न्यास का उद्देश्य डा. श्यामाप्रसाद मुकर्जी के सपनों के भारत का निर्माण करना है जो सम्पूर्ण भारत को एक इकाई के रूप में देखते थे | उन्होंने कहा कि देश में आज पशुपति से तिरुपति तक माओ का असर बढ रहा है | भारत की सीमा से लगे लगभग 40 हजार वर्ग किमी.पर पडोसी देश कब्जा जमाए हुए है, आश्चर्य है कि सरकार उस स्थिति में चुप्पी साधे हुए है जबकि गृह मंत्रालय इस बात को स्वीकार कर रहा है | पूर्व भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि आज हम पार्टी के सूत्र '' राष्ट्र प्रथम, पार्टी द्वितीय, स्वयं अंत'' को चरितार्थ करें , डा. श्यामाप्रसाद के बलिदान को यही सच्ची श्रद्धांजलि हो सकती है | मंच संचालन करते हुए नन्दकिशोर गर्ग ने कहा कि बंगाल ने देश को कई विभूतियाँ दी हैं, जबकि दो सपूतों सुभाषचन्द्र बोस और डा. श्यामाप्रसाद मुकर्जी को देश में काफी समय तक सत्तासीन रही पार्टी ने हमेशा नजरअंदाज किया है |
रिपोर्ट आशुतोष चतुर्वेदी
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