देवर्षि नारद जयन्ती पर दिशा स्मारिका का विमोचन
घुसपैठ और मतान्तरण जैसे राष्ट्रीय मुद्दों पर मीडिया मौन क्यों ? - मदनदास
नई दिल्ली.१२ मई २००९
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख श्री मदनदास देवी ने कहा है कि ब्रह्माण्ड के प्रथम पत्रकार देवर्षि नारद सत्य का संकेत और आने वाले संकट की सूचना देने के लिए जाने जाते हैं लेकिन आज के नारद अर्थात राष्ट्रीय पत्रकार सत्य और आने वाले संकट दोनों पर मौन हैं. श्री मदनदास देवी मंगलवार को देवर्षि नारद जयन्ती के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मीडिया विभाग 'इंद्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र' द्वारा आयोजित कार्यक्रम में विचार व्यक्त कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने संवाद केन्द्र द्वारा प्रकाशित स्मारिका 'दिशा' का विमोचन भी किया।
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श्री मदनदास देवी ने कहा कि पूर्वोत्तर में असम जैसे राज्यों में बंग्लादेशी घुसपैठ चरम पर है, लेकिन इसके बारे में राष्ट्रीय समाचार पत्रों से चिन्ता और सूचना दोनों गायब है। बंग्लादेशी घुसपैठियों पर मीडिया मौन है, इस बारे में ४० हजार से अधिक छात्रों व शिक्षकों ने चिकन नेक पर एकत्र होकर प्रदर्शन किया तथा घुसपैठ पर राष्ट्रपति को ज्ञापन दिया तब भी कुछ स्थानीय पत्रों को छोड़कर राष्ट्रीय पत्रों में ये खबरें नहीं छपीं। श्री मदनदास देवी ने वनवासी क्षेत्रों में चल रहे मतान्तरण पर चिंता प्रकट करते हुए कहा कि मतान्तरण काफी गंभीर समस्या है और मीडिया इसे भी नज़रंदाज़ कर रहा है. इसका सबसे बड़ा कारण मीडिया में विश्लेषण और चिन्तन के भाव की कमी है। मीडिया को इस तरह के गंभीर राष्ट्रीय मसलों की चर्चा निडर होकर प्रकाशित करनी चाहिए.
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ पत्रकार एवं डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी शोध अधिष्ठान के निदेशक श्री तरुण विजय ने कहा कि समाज के अंतिम व्यक्ति की आवाज बुलंद करना एक पत्रकार के कलम-धर्म की सच्ची कसौटी है। पत्रकारिता ऋषिकर्म है। जिसका पालन निडर भाव से होना चाहिए। ब्रह्माण्ड के प्रथम पत्रकार देवर्षि नारद ने निर्भीकता व साहस से अपने इसी ऋषिकर्म का निर्वाह किया जिनकी वाणी और लेखन में कटुता का अभाव था. भारतीय पत्रकारिता के लिए आज का दौर सर्वाधिक रोमांचक है जो अपने नित नए प्रयोगों से पूरी दुनिया में कीर्तिमान रच रही है। श्री तरुण विजय ने कहा कि भारतीय भाषा के पत्रकारों में अध्ययन की कमी है, नई पीढ़ी के पत्रकारों की न तो भाषा समृद्ध है और न ही उन्हें साहित्य व संस्कृति का ज्ञान अर्जित करना पत्रकारिता में सफलता के लिए आवश्यक लगता है। ऐसी स्थिति में अखबारों में गहन विश्लेषणों की जगह बाजारवाद छा गया है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी पत्रकारिता राष्ट्र के लिए चुनौती है क्योंकि अंग्रेजी पत्रकारिता अंग्रेजियत व पश्चिमी विश्व दृष्टि को प्रसारित करने का औपनिवेशिक उपकरण बन गयी है। बाजारवाद के प्रभाव से समाचार प्रत्रों से सम्पादक का स्थान गौण होता गया है। आज समाचार पत्र मालिकों द्वारा संचालित किए जाते हैं जिसकी वजह से अखबार का प्राण संपादकीय पृष्ठ अब पेज थ्री बन गया है और पत्रों की भाषा फिल्मी हो गयी है। हिन्दी अखबारों में अनावश्यक रोमन शब्द जोड़कर शीर्षक बनाये जा रहे हैं।
श्री तरुण विजय ने कहा कि भारतीय मीडिया के विदेशों में यहां तक कि पड़ोसी देशों में भी बहुत कम संवाददाता हैं। चीन जैसे पड़ोसी देश में हमारे सिर्फ दो संवाददाता हैं जबकि भारत में चीन के २२ संवाददाता हैं। उन्होंने कहा कि आज का यह सत्य मान्य है कि पत्रकारिता व्यवसाय है लेकिन व्यवसाय में भी मिलावट क्यों? पत्रकारिता से अर्जित पैसा पत्रकारों और पत्रकारिता का स्तर बढ़ाने पर खर्च नहीं होता। अखबारों के व्यवसायिक स्थानीयण के कारण हमें कारगिल, लेह और तवांग जैसी अतिमहत्वपूर्ण सीमावर्ती जगहों की खबरें नहीं मिल पातीं। पत्रकारिता में एक वर्ग वैचारिक द्वेष के आधार पर हिन्दुत्व के विरुद्ध पूर्वाग्रही विषवमन सेकुलरवादी कर्तव्य मानता है जिससे सत्य पर आघात होता है। फिर भी भारत अपने सांस्कृतिक बल के आधार पर आगे बढ़ेगा। यह बल किसी के पास नहीं है नारद जी ने हमकों यही सिखाया है । यह हमें विश्व में सबसे आगे पहुंचाएगा।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, दिल्ली के प्रान्त संघचालक श्री रमेश प्रकाश ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा व संघ कार्य की जानकारी कार्यकर्त्ताओं और देश को सही ढंग से मिलनी चाहिए, इसलिए प्रचार की दृष्टि से ‘दिशा’ जैसी स्मारिकाओं का प्रकाशन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आज मीडिया का एक वर्ग पूर्वाग्रहों के कारण हमारे पक्ष में नहीं है ऐसे समय में बुद्धिजीवियों के ज्वलंत मुद्दों को स्मारिका के माध्यम से जनता के सम्मुख लाने में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मीडिया विभाग बधाई का पात्र है। कार्यक्रम का संचालन इंद्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र के सचिव श्री वागीश ईसर ने किया। ‘दिशा’ स्मारिका के संपादक एवं वरिष्ठ पत्रकार श्री नरेन्द्र सहगल का भी इस अवसर पर अभिनन्दन किया गया।
प्रदीप कुमार मिश्रा
शोध पत्रकार