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नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। ताकत का प्रदर्शन कर दिया गया। महंगाई के मुद्दे पर दिल्ली में आयोजित महारैली के जरिए भारतीय जनता पार्टी ने केंद्र सरकार के सामने और पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने पार्टी के उन नेताओं के सामने, जो उन पर उम्र, अनुभव व उनके कद को लेकर सवाल उठा रहे थे। रैली के दौरान पार्टी के सभी प्रमुख नेता न केवल गडकरी के साथ खड़े हुए, बल्कि उन्होंने रैली की सफलता के लिए उनकी जमकर तारीफ भी की। भाजपा नेताओं ने महंगाई रोकने में नाकाम रही केंद्र की संप्रग सरकार को उखाड़ फेंकने का आह्वान किया।
भाजपा ने लंबे समय बाद देश की राजधानी में इतना बड़ा प्रदर्शन किया। इसके जरिए उसने अपने कार्यकर्ताओं में नए जोश का संचार तो किया ही, विरोधियों को भी जता दिया कि उसका नेतृत्व भले ही बदला हो, लेकिन उसका कैडर अभी भी बेहद ताकतवर है। गडकरी के लिए तो यह रैली चुनौती भी थी क्योंकि उन्हें अपनी नई युवा टीम के साथ पार्टी को एकजुट व मजबूत दिखाना था। इसमें वह सफल भी रहे। कमजोर केंद्र के चलते निरंकुश हो रहे राज्यों पर भी गडकरी की पकड़ दिखी। रैली के लिए हर राज्य के लिए लक्ष्य दिया गया था। इनमें सबसे अव्वल मध्य प्रदेश रहा। प्रदेश के नेताओं ने लगभग 40,00 लोगों के आने का दावा किया। अन्य राज्यों से भी पिछली रैलियों की तुलना में काफी ज्यादा लोग जुटे।
दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में उमड़ी भीड़ ने नेताओं में भी उत्साह भरा। लालकृष्ण आडवाणी, सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, राजनाथ सिंह, डा. मुरली मनोहर जोशी व वेंकैया नायडू के साथ पार्टी के शासन विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों रमन सिंह, प्रेम कुमार धूमल, शिवराज सिंह चौहान व बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने भी रैली को संबोधित किया। रमेश पोखरियाल निशंक देर से पहुंचे। सभी वक्ताओं ने एक सुर में महंगाई के लिए संप्रग सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया। पार्टी नेताओं ने कार्यकर्ताओं से यह संकल्प भी लिया कि इस मुद्दे पर उनका संघर्ष संसद से सड़क तक जारी रहेगा। रैली के भाजपा नेताओं के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं ने संसद की तरफ कूच किया। चिलचिलाती धूप की के बावजूद कार्यकर्ताओं के जोश में कोई कमी नहीं दिखी। प्रदर्शन स्थल से तीन किलोमीटर दूर संसद मार्ग तक ये कार्यकर्ता महंगाई विरोधी नारों की गूंज संसद तक पहुंचा रहे थे।
प्रमुख नेताओं के भाषणों के अंश
'हम जनता के द्वार पर हैं..जिस शासन में युवाओं को रोजगार नहीं मिले, किसान को कीमत नहीं मिले, लोगों को सुरक्षा नहीं मिले..उस शासन को उखाड़ फेंकना चाहिए।'
- नितिन गडकरी, भाजपा अध्यक्ष
'यह रैली लोगों की संख्या के लिहाज से भी अभूतपूर्व है और 'महंगाई' जैसे आम लोगों की परेशानियों से जुड़े विषय को लेकर अद्भुत है।'
-लालकृष्ण आडवाणी, राजग अध्यक्ष
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'सरकार प्राकृतिक आपदा, अधिक समर्थन मूल्य और आर्थिक मंदी को महंगाई के लिए जिम्मेदार ठहराती है। लेकिन कीमतों में वृद्धि गलत आर्थिक नीतियां और घोटालों के कारण हुई है।'
-सुषमा स्वराज, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष
'यह सरकार हर मोर्चे पर विफल रही है। चाहे आतंकवाद और माओवादियों से निपटने का मामला हो या आम लोगों की खुशहाली की बात। महंगाई को कम करने के मोर्चे पर तो सरकार पूरी तरह से विफल हो गई है।'
- अरुण जेटली, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष
'सरकारी गोदामों में लाखों टन अनाज खुले आसमान के नीचे रखा सड़ रहा है। लेकिन लोगों को उपयुक्त कीमत पर अनाज नहीं मिल रहा।'
- राजनाथ सिंह, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, भाजपा
'केंद्र सरकार की की संट्टेबाजों और कालाबाजारियों के साथ मिलीभगत है। कीमतों के बारे में सरकार की कोई नीति नहीं है।'
- डा. मुरली मनोहर जोशी, वरिष्ठ नेता भाजपा
गर्मी से गश खाकर गिरे गडकरी
भारतीय जनता पार्टी के लिए महंगाई पर महारैली का सफल आयोजन भले की खुश होने का सबब हो। लेकिन पार्टी के अध्यक्ष नितिन गडकरी के लिए इस आयोजन से थोड़ी मुश्किल हो गई।
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चिलचिलाती धूप में रामलीला मैदान पर गडकरी के भाषण के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने संसद पर प्रदर्शन के लिए कूच करना था। लेकिन गर्मी की मार गडकरी बर्दाश्त नहीं कर पाए। भाषण समाप्त करने के बाद वह लड़खड़ा गए और ट्रेक्टर से उतरकर सड़क पर बैठ गए। एक पल तो यह लगा कि वह बेहोश हो गए हैं लेकिन पास खड़े नेताओं ने उन्हें संभाल लिया। कुछ देर बाद काफिला आगे बढ़ा। टै्रक्टर के बने खुले रथों पर भाजपा नेता सवार थे। पहले रथ पर गडकरी, लालकृष्ण आडवाणी, राजनाथ सिंह, सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, मुरली मनोहर जोशी और अन्य वरिष्ठ नेता थे। वहीं इसके बाद वाले रथों पर भाजपा के दूसरी कतार के नेता मौजूद थे।
मोदी और येद्दयुरप्पा की गैरमौजूदगी की रही चर्चा
पार्टी के इस शक्ति प्रदर्शन में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी व कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी.एस. येद्दयुरप्पा की गैरमौजूदगी चर्चा का विषय रही। मोदी और येद्दयुरप्पा की अनुपस्थिति के बारे में पूछे जाने पर भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, 'उनकी अनुपस्थिति को किसी अन्य रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। विरोध प्रदर्शनों में आमतौर पर मुख्यमंत्री शामिल नहीं होते हैं।' यह पूछने पर कि रैली में फिर छत्ताीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उत्ताराखंड के मुख्यमंत्री निशंक क्यों मौजूद थे? भाजपा प्रवक्ता ने कहा 'सरकारी बैठकों में व्यस्त रहने के कारण मोदी और येद्दयुरप्पा नहीं आ सके। इसमें और कोई बात नहीं है।'
भाजपा सांसदों ने किया संसद का बहिष्कार
भाजपा की रैली से संसद का कामकाज भी प्रभावित हुआ। प्रमुख विपक्षी दल की संसद से संभावित अनुपस्थिति को देखते हुए पहले से ही दोनों सदनों में बुधवार को गैर सरकारी सदस्यों के कामकाज के रूप में तय किया था।
भाजपा सदस्यों को रैली में जाना था, इसलिए लोकसभा में सदन शुरू होते ही भाजपा ने महंगाई पर सदन स्थगित करने की मांग की। इसे अध्यक्ष ने नहीं माना, लेकिन विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज को बोलने का मौका दिया। उन्होंने सरकार पर महंगाई रोकने में नाकामी का आरोप लगाते हुए कहा कि दिल्ली की सड़कों पर देश भर के लोग जमा है। सरकार कम से कम अब तो जाग जाए। इसके बाद उनके नेतृत्व में भाजपा सांसद सदन का बहिष्कार कर रैली में शामिल होने चले गए। राज्यसभा की कार्यवाही तो शुरू होते ही मौजूदा सांसद कृष्णलाल वाल्मीकि के निधन से दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई।
Source:-http://in.jagran.yahoo.com/news/national/politics/5_2_6354463.html